खटीमा मसूरी और रामपुर तिराहा कांड के साथ श्रीयंत्र टापू कांड भी उत्तराखंड आन्दोलन मैं एक प्रमुख घटना थी जिसने आन्दोलन मैं अपनी सबसे जोरदार उपस्थिति दर्ज की था, १० नवम्बर १९९५ को श्रीयंत्र टापू श्रीनगर गढ़वाल में घटे इस मार्मिक घटना में दो आंदोलनकारी सहीद यशोधर बेंजवाल और राजेश रावत भी सहीद हुए, आन्दोलन के डोर मैं पुलिसिया अत्याचार की यहाँ सबसे शर्मनाक घटना थी.इसमें पुलिस द्वारा दोनों सहीदो के शवो को १० दिनों तक छुपा कर रखा था ..बाद मैं लगातार बड़ते जनाक्रोश मैं पुलिस ने अलकनंदा के तट पर दोनों की लाशो को फेक दिया था. ये रुद्रपर्याग जिले के दो उन अकेले सहीदो मैं से है जिनकी बदोलत आज हम उत्तराखंड मैं रह रहे है..इनका जनम बेंजी गाँव मैं श्री मित्रानंद बेंजवाल के घर मैं हुआ था . ये बेहद साधारण लेकिन देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना रखने वाले थे..मैं आन्दोलन के वक्त तिहाड़ जेल मैं लिखी कविता के कुछ अंश चिल्लाने से नहीं पड़ा उनकी नींदों मैं खलाल
महलो के बंद किवाडो पर अब मुसल बरसाने होंगे
कौन तुम्हे अधिकार उपहार मैं देगा ये ऐसा लोकतंत्र है
जहा हमको भाले बरसाने होंगे

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